जैन विश्व भारती द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आवासीय विद्यालय के संदर्भ में आचार्य प्रवर के विचार

  • एक ऐसा विद्यालय जहां पढ़ाई भी अच्छी हो और संस्कार भी अच्छे मिल सके।
  • तेरापंथ समाज यह न सोचें कि हमारे यहां पर उच्च स्तर का विद्यालय नहीं है इसलिए हमें अन्य विद्यालयों में अपने बच्चों को भेजना पड़ता है।
  • समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ जैनत्व के तेरापंथ के संस्कार अच्छे मिल सके। उनका जीवन अच्छा बन सके ,वे समाज के लिए उपयोगी बन सके,वे समस्या नहीं समाधान बन सके ,ऐसी विद्यार्थी पीढ़ी तैयार हो इस दृष्टि से जो विद्यालय का प्रकल्प है वह अपने आप में महत्वपूर्ण है।