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जैन विश्व भारती समस्त भारतीय एवं प्राच्य आत्म-विद्याओं का केंद्र है. इस संस्थान के माध्यम से आत्म-विद्याओं के शोध, अध्ययन एवं प्रसार की विभिन्न प्रवृत्तियों का संचालन हो रहा है. जैन विश्व भारती एक उदीयमान संस्था है. मैं इसके उज्जवल भविष्य के प्रति तनिक भी संदिग्ध नहीं हूँ, क्योंकि संपूर्ण श्रावक समाज इसके विकास की दृष्टि से जागरूक है. अधिकारी वर्ग अपने दायित्व निर्वहन के प्रति सचेष्ट हैं. विद्वत वर्ग भी समय-समय पर अपने बहुमूल्य सुझावों के माध्यम से इस संस्थान को सींच रहा है. यदि जागरूकता, दायित्व-निर्वहन एवं सिंचन का क्रम बराबर चलता रहे तो मेरा आत्मविश्वास कहता है की यह संस्थान अपनी गति से आगे बढ़ता हुआ न केवल जैन समाज के लिए, अपितु समग्र मानव समाज के लिए एक वरदान सिद्ध होगा.

- आचार्य तुलसी

आचार्य तुलसी ने जो एक धर्मक्रांति का मार्ग प्रशस्त किया वह आगे बढ़ रहा है. उसमें जैन विश्व भारती का स्थान पहला है. विश्व भारती की टीम से मुझे संतोष है क्योंकि वह अनुशासन, मर्यादा और व्यवस्था के प्रति जागरूक है. विश्व भारती का आकार छोटा है पर प्राकर बड़ा है. यहाँ के प्रति लोगों में अवधारणा है कि यह मानव समाज और व्यक्तित्व निर्माण के लिए कल्याणकारी संस्था है. व्यक्तित्व निर्माण की एक कड़ी है – स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और स्वस्थ अर्थव्यवस्था. अहिंसा, शान्ति एवं अर्थशास्त्र ये तीन चीजें यहाँ से आगे बढ़ें. जो गुरुद्रिष्टि से कार्य करता है वह आगे बढ़ता है. आचार्य तुलसी की तरह कल्पनाशील, विचारशील व आचारनिष्ठा से सब कार्य करें तो कार्य सफल हो जाता है. गुरुदेव तुलसी ने ऐसे सूत्र दिए जो वरदान बनकर हमें सफल बना रहें हैं.

- आचार्य महाप्रज्ञ




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